बढ़ते विदेशी व्यापार के कारण भारत में सेंसेक्स मार्केट शेयर बाजार में तेजी बनी रहेगी।

विश्व भर में फैली अनिश्चिताओं और व्यापक आर्थिक अनिश्चताओं के बाद भी भारत का विदेश व्यापार तीव्र गति से बढ़ते हुए वित्तीय वर्ष 2023 24 मई 1,60,000 करोड डालर से भी ज्यादा हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव में ने अपने जारी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है की चालू वित्त वर्ष के लिए यह भारतीय जीडीपी, जो कि वर्तमान में लगभग 3,40,000 करोड़ है, का लगभग 48% होगा। ध्यान देने की बात यह है की यह निर्यात वस्तुओं के निर्यात की अपेक्षा सेवाओं के निर्यात का ज्यादा है, और सेवा निर्यात में वृद्धि से भारत के कुल निर्यात में  बढ़ोतरी है।



 चालू वित्त वर्ष में भारत का कुल निर्यात माल और सेवा को मिलाकर लगभग 755 अमेरिकी डॉलर रहने का अनुमान है, यह उससे पूर्व के वित्तीय वर्ष 2021-22 की तुलना में लगभग 11  11.5% से भी अधिक होगा, वही वर्तमान वित्तीय वर्ष में भी भारत के व्यापारिक निर्यात में और सेवा निर्यात में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

Fixed deposit ने डेट फंड और इक्विटी से शानदार रिटर्न अपने निवेशकों को दिया।


विश्व भर में अनेक देशों में बैंकों के ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी का सिलसिला रुकने का नाम भी नहीं ले रहा। अमेरिका में भी वर्तमान में फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें पिछले कई वर्षों के मुकाबले में सर्वाधिक हैं। 

भारत में भी वर्तमान में बैंकों द्वारा लगातार अपने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की गई है, जिसके कारण बैंकों में एफडी | फिक्स्ड डिपॉजिट करवाने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। वहीं पर विश्व में छाई आर्थिक अनिच्छता के कारण इक्विटी में लगातार गिरावट नजर आई है और निवेशकों का भरोसा वर्तमान समय में इक्विटी और डेट फंड के मुकाबले 60% बड़ा है।

 रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई द्वारा भी रेपो दर पिछले कई महीनों से कई बार बढ़ाई गई है, वही वर्तमान समय में हैंडसम शेयर बाजार का पूरा ध्यान आरबीआई द्वारा इस सप्ताह प्रस्तुत की जाने वाली मौद्रिक समिति की होने वाली बैठक के फैसले पर टिका है। आर्थिक विशेषज्ञों का यह मानना है कि आरबीआई एक बार फिर से वर्तमान में ब्याज दरों में 0.25% बढ़ोतरी कर सकता है।


 शेयर मार्केट टिप्स

सेंसेक्स शेयर बाजार के निवेशकों को वर्तमान समय में इस हैंडसम शेयर बाजार में बहुत ही सतर्क रहने की आवश्यकता है। निवेशक शेयर इस डियर बाजार में होने वाली प्रत्येक गिरावट में थोड़ा-थोड़ा निवेश sip के माध्यम से करते रहे। सिप के माध्यम से निवेश करने से जो पूंजी बाज़ार में जोखिम की मात्रा कम हो जाती है। निवेशक को हमेशा ही दीर्घकालीन नजरिए के साथ ही एस हैंडसम शेयर बाजार में निवेश करने आना चाहिए। डियर बाजार कोई bhutiya dada या khatarnak bhoot नहीं है। निवेशक को शेयर बाजार की सेहत पर अपनी गहरी नजर बनाए रखनी चाहिए।

भारत से स्मार्टफोन निर्यात में भारी तेजी

भारत सरकार के मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत स्मार्टफोन की मैन्युफैक्चरिंग में भारी तेजी आई है। आज से कुछ वर्ष पहले भारत पूर्ण रूप से स्मार्टफोन के आयात पर निर्भर था, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा मेक इन इंडिया प्रोग्राम को बढ़ावा दिया गया, जिसके शानदार रिजल्ट अब दिखाई देने लगे हैं। बीते वित्तीय वर्ष 2022 23 में ऐसी संभावना है की भारत का स्मार्टफोन का निर्यात 10 अरब डालर यानि ₹ 82,000 करोड़ भारतीय रुपए से भी ज्यादा पहुंच सकता है। भारत से होने वाले स्मार्टफोन के निर्यात में  एप्पल कंपनी के स्मार्टफोन की हिस्सेदारी 50% तक होने की उम्मीद है, वहीं पर एक दूसरी दिग्गज कंपनी सैमसंग की हिस्सेदारी उक्त निर्यात में 40% तक हो सकती है, शेष अन्य कंपनियों की हिस्सेदारी 10 परसेंट तक हो सकती है।


भारत के आर्थिक क्षेत्र की कुछ प्रमुख झलकियां।

👉 भारत में मोदी सरकार द्वारा विमानन क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिसके कारण देश में विमान ईंधन की भाग लगातार बढ़ रही है, और विमानों की मांग भारत में 25.7 परसेंट बढ़कर 6,14,000 टन तक पहुंच गई है।

👉 भारत के परिवहन क्षेत्र, उद्योग क्षेत्र, कृषि क्षेत्र में पेट्रोलियम पदार्थों की मांग तेजी से बड़ी है, और पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री मार्च माह में 5.1% बढ़कर 26.5 लाख टन तक पहुंच गई है। वहीं पर मासिक आधार पर बिक्री का आकलन करने पर यह बढ़ोतरी 3.4% है। इस दौरान डीजल की मांग में 2.1 परसेंट की तेजी आई है और यह  68.1लाख टन हो गई है। मासिक आधार पर मांग में यह बढ़ोतरी 4.5% है।

👉 भारत में  मार्च में बिजली खपत 0.74% घटकर 127.52 अरब यूनिट रह गई है। भारत में विगत 31 महीने के दौरान यह पहला मौका है जब देश में बिजली की खपत घटी है। भारत में बिजली की खपत में कमी आने का प्रमुख कारण मार्च में तापमान कम रहना है। मार्च में तापमान कम होने का प्रमुख कारण पश्चिमी विक्षोभ के कारण देश के कई हिस्सों में भारी बारिश का होना है।

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